सरसई नावर झील
सरसई नावर झील को 2019 में रामसर स्थल घोषित किया गया — यानी अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि। पूरे देश में गिनी-चुनी जगहों को यह दर्जा मिला है, और उनमें से एक हमारे ज़िले में है।
नाम भी उसी पक्षी से आया है जो यहाँ रहता है — सारस। रामसर के आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार यहाँ लगभग 400 सारस बसेरा करते हैं, जो इस पूरे इलाक़े का सबसे बड़ा झुंड है। और सारस कोई मामूली चिड़िया नहीं — यह दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी है, और उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी।
सर्दियों में यहाँ मध्य एशिया से प्रवासी पक्षी आते हैं — पिनटेल, विजन, बार-हेडेड गूज़। तीन तरह के स्टॉर्क साल भर रहते हैं। और यह झील मछलियों का प्रजनन-स्थल भी है — रोहू, कतला — यानी गंगा की मछली-विविधता इससे जुड़ी है।
सरकार यहाँ "सारस सर्किट" बनाने की योजना पर काम कर रही है — मैनपुरी व इटावा की आर्द्रभूमियों को जोड़कर।