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शहर से ~22 किमी

सरसई नावर झील

रामसर स्थल — अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि · सारस क्रेन का घर

सरसई नावर झील को 2019 में रामसर स्थल घोषित किया गया — यानी अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि। पूरे देश में गिनी-चुनी जगहों को यह दर्जा मिला है, और उनमें से एक हमारे ज़िले में है।

नाम भी उसी पक्षी से आया है जो यहाँ रहता है — सारस। रामसर के आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार यहाँ लगभग 400 सारस बसेरा करते हैं, जो इस पूरे इलाक़े का सबसे बड़ा झुंड है। और सारस कोई मामूली चिड़िया नहीं — यह दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी है, और उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी

सर्दियों में यहाँ मध्य एशिया से प्रवासी पक्षी आते हैं — पिनटेल, विजन, बार-हेडेड गूज़। तीन तरह के स्टॉर्क साल भर रहते हैं। और यह झील मछलियों का प्रजनन-स्थल भी है — रोहू, कतला — यानी गंगा की मछली-विविधता इससे जुड़ी है।

सरकार यहाँ "सारस सर्किट" बनाने की योजना पर काम कर रही है — मैनपुरी व इटावा की आर्द्रभूमियों को जोड़कर।

2019
रामसर स्थल घोषित
~400
सारस — इलाक़े का सबसे बड़ा झुंड
~22 किमी
इटावा से
राज्य पक्षी
सारस — UP का
जाने का समय: नवंबर से फ़रवरी — प्रवासी पक्षी आए हुए, मौसम अच्छा। सुबह जल्दी जाओ। दूरबीन ले जाओ तो मज़ा दोगुना। शोर मत करो, पक्षियों के पास मत जाओ — घोंसले के मौसम में ख़ास तौर पर। यह विकसित पर्यटन स्थल नहीं है; खेतों से घिरी झील है। पर्यावरण पन्ने पर और
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सरसई नावर झील कहाँ है?
शहर से ~22 किमी। रामसर स्थल — अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि · सारस क्रेन का घर
सरसई नावर झील जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
जाने का समय: नवंबर से फ़रवरी — प्रवासी पक्षी आए हुए, मौसम अच्छा। सुबह जल्दी जाओ। दूरबीन ले जाओ तो मज़ा दोगुना। शोर मत करो, पक्षियों के पास मत जाओ — घोंसले के मौसम में ख़ास तौर पर। यह विकसित पर्यटन स्थल नहीं है; खेतों से घिरी झील है। पर्यावरण पन्ने पर और।
सरसई नावर झील का इतिहास क्या है?
सरसई नावर झील को 2019 में रामसर स्थल घोषित किया गया — यानी अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि। पूरे देश में गिनी-चुनी जगहों को यह दर्जा मिला है, और उनमें से एक हमारे ज़िले में है। नाम भी उसी पक्षी से आया है जो यहाँ रहता है — सारस। रामसर के आधिकारिक दस्ताव…

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