बटेश्वर के मंदिर
यमुना के किनारे, एक ही जगह पर सौ से ज़्यादा मंदिर — ज़्यादातर शिव के। घाटों की क़तार पानी तक उतरती है, और पीछे मंदिरों की क़तार खड़ी है। सुबह की रोशनी में यह जगह किसी और सदी की लगती है।
यहाँ हर साल नवरात्रि के आसपास बटेश्वर का मेला लगता है, जो इस पूरे इलाक़े के सबसे पुराने मेलों में है — पशु मेला, दुकानें, भीड़, और नदी।
तकनीकी रूप से यह आगरा ज़िले में पड़ता है, पर इटावा से यह उतना ही पास है जितना अपना कोई मोहल्ला। एक दिन में आराम से हो आते हो।