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इटावा से ~35 किमी · बाह की ओर, यमुना किनारे

बटेश्वर के मंदिर

100 से ज़्यादा मंदिर · शिव को समर्पित

यमुना के किनारे, एक ही जगह पर सौ से ज़्यादा मंदिर — ज़्यादातर शिव के। घाटों की क़तार पानी तक उतरती है, और पीछे मंदिरों की क़तार खड़ी है। सुबह की रोशनी में यह जगह किसी और सदी की लगती है।

यहाँ हर साल नवरात्रि के आसपास बटेश्वर का मेला लगता है, जो इस पूरे इलाक़े के सबसे पुराने मेलों में है — पशु मेला, दुकानें, भीड़, और नदी।

तकनीकी रूप से यह आगरा ज़िले में पड़ता है, पर इटावा से यह उतना ही पास है जितना अपना कोई मोहल्ला। एक दिन में आराम से हो आते हो।

100+
मंदिर एक ही जगह
~35 किमी
इटावा से
नवरात्रि
मेले का समय
यमुना
किनारे बसे घाट
अच्छा समय: सुबह जल्दी — भीड़ कम, रोशनी अच्छी। मेले के दिनों में बहुत भीड़ होती है, बच्चों का हाथ पकड़े रहो। घाट की सीढ़ियाँ फिसलन भरी होती हैं। चंबल अभयारण्य पास ही है, दोनों एक ही दिन में हो सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बटेश्वर के मंदिर कहाँ है?
इटावा से ~35 किमी · बाह की ओर, यमुना किनारे। 100 से ज़्यादा मंदिर · शिव को समर्पित
बटेश्वर के मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
अच्छा समय: सुबह जल्दी — भीड़ कम, रोशनी अच्छी। मेले के दिनों में बहुत भीड़ होती है, बच्चों का हाथ पकड़े रहो। घाट की सीढ़ियाँ फिसलन भरी होती हैं। चंबल अभयारण्य पास ही है, दोनों एक ही दिन में हो सकते हैं।
बटेश्वर के मंदिर का इतिहास क्या है?
यमुना के किनारे, एक ही जगह पर सौ से ज़्यादा मंदिर — ज़्यादातर शिव के। घाटों की क़तार पानी तक उतरती है, और पीछे मंदिरों की क़तार खड़ी है। सुबह की रोशनी में यह जगह किसी और सदी की लगती है। यहाँ हर साल नवरात्रि के आसपास बटेश्वर का मेला लगता है, जो इस पूरे इलाक़े के सबसे पुराने मेलों में है — पशु मेला, दुकानें, भीड़, और नदी…

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