काली वाहन मंदिर
इटावा में किसी ने नई गाड़ी ली हो — कार, बाइक, ट्रैक्टर, कुछ भी — तो पहली पूजा यहीं होती है। यह रिवाज़ इतना पक्का है कि नवरात्रि व शुभ दिनों में मंदिर के बाहर गाड़ियों की क़तार लग जाती है।
माँ काली का यह प्राचीन स्थान शहर के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में है, और टीले पर भैरव बाबा का स्थान भी है। इसे "बीहड़ वाली मैया" भी कहा जाता है। नवरात्रि में यहाँ मेले जैसा माहौल हो जाता है।
यहाँ एक मान्यता चली आती है — कहते हैं कि पुजारी जब हर सुबह मंदिर का दरवाज़ा खोलते हैं, तो भीतर ताज़े फूल पहले से रखे मिलते हैं। मानो या न मानो, यह कहानी हर इटावा वाले ने सुनी है।
यह उन जगहों में है जो पर्यटक की सूची में नहीं आतीं — क्योंकि यह पर्यटन नहीं, शहर की आदत है।