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शहर के भीतर · यमुना की ओर

काली वाहन मंदिर

प्राचीन शक्तिपीठ · "बीहड़ वाली मैया" भी कहते हैं · नई गाड़ी की पूजा यहीं

इटावा में किसी ने नई गाड़ी ली हो — कार, बाइक, ट्रैक्टर, कुछ भी — तो पहली पूजा यहीं होती है। यह रिवाज़ इतना पक्का है कि नवरात्रि व शुभ दिनों में मंदिर के बाहर गाड़ियों की क़तार लग जाती है।

माँ काली का यह प्राचीन स्थान शहर के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में है, और टीले पर भैरव बाबा का स्थान भी है। इसे "बीहड़ वाली मैया" भी कहा जाता है। नवरात्रि में यहाँ मेले जैसा माहौल हो जाता है।

यहाँ एक मान्यता चली आती है — कहते हैं कि पुजारी जब हर सुबह मंदिर का दरवाज़ा खोलते हैं, तो भीतर ताज़े फूल पहले से रखे मिलते हैं। मानो या न मानो, यह कहानी हर इटावा वाले ने सुनी है।

यह उन जगहों में है जो पर्यटक की सूची में नहीं आतीं — क्योंकि यह पर्यटन नहीं, शहर की आदत है।

शक्तिपीठ
माँ काली का प्राचीन स्थान
नवरात्रि
सबसे रौनक का समय
शहर में
अलग से सफ़र नहीं
भैरव बाबा
टीले पर
नोट: नवरात्रि व शुभ मुहूर्त में बहुत भीड़ व लंबी क़तार होती है — जल्दी पहुँचो। गाड़ी की पूजा करानी हो तो पहले पता कर लो कि समय क्या है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

काली वाहन मंदिर कहाँ है?
शहर के भीतर · यमुना की ओर। प्राचीन शक्तिपीठ · "बीहड़ वाली मैया" भी कहते हैं · नई गाड़ी की पूजा यहीं
काली वाहन मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
नोट: नवरात्रि व शुभ मुहूर्त में बहुत भीड़ व लंबी क़तार होती है — जल्दी पहुँचो। गाड़ी की पूजा करानी हो तो पहले पता कर लो कि समय क्या है।
काली वाहन मंदिर का इतिहास क्या है?
इटावा में किसी ने नई गाड़ी ली हो — कार, बाइक, ट्रैक्टर, कुछ भी — तो पहली पूजा यहीं होती है। यह रिवाज़ इतना पक्का है कि नवरात्रि व शुभ दिनों में मंदिर के बाहर गाड़ियों की क़तार लग जाती है। माँ काली का यह प्राचीन स्थान शहर के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में है, और टीले पर भैरव बाबा का स्थान भी है। इसे "बीहड़ वाली मैया" भी…

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