इटावा सफारी पार्क
यह कहानी शेरों से नहीं, पेड़ों से शुरू होती है। 1884 में — यानी आज से लगभग 140 साल पहले — अंग्रेज़ों के ज़माने में यहाँ के बीहड़ों को रोकने के लिए एक जंगल लगाया गया था। मक़सद सीधा था: मिट्टी बह रही थी, कटान बढ़ रहा था, इसलिए पेड़ लगाओ। उस जंगल का नाम पड़ा फ़िशर फ़ॉरेस्ट — और यह प्रदेश के सबसे पुराने वृक्षारोपणों में गिना जाता है।
किसी ने तब सोचा भी नहीं होगा कि सवा सौ साल बाद उसी जंगल में एशियाई शेर घूमेंगे।
2005 में लायन ब्रीडिंग सेंटर का विचार आया, 2012 में काम शुरू हुआ। डिज़ाइन स्पेन की कंपनी Art Urbà ने बनाया, और अधिकारी इंग्लैंड के मशहूर Longleat Safari Park तक देखने गए। 2014 में गुजरात के गिर और कानपुर चिड़ियाघर से शेर लाए गए। और नवंबर 2019 में यह जनता के लिए खुला।
यहाँ आप पिंजरे में नहीं होते, गाड़ी में होते हो — और जानवर खुले घूमते हैं। शेर के लिए ही 50 हेक्टेयर का इलाक़ा है। और हाँ, अंदर भारतीय सेना के दो विजयंता टैंक और एक पुराना भाप का इंजन भी खड़ा है — जिसका शेरों से कोई लेना-देना नहीं, पर बच्चों को सबसे ज़्यादा वही पसंद आता है।