🤝 अपने सांसद-विधायक के साथ मिलकर मोहल्ले का काम कराओ💰 हर साल ₹5 करोड़ सांसद निधि + ₹5 करोड़ विधायक निधि — आपके क्षेत्र के लिए📋 वे वही सिफ़ारिश कर सकते हैं जो कोई माँगे — अच्छा प्रस्ताव उनका काम आसान करता है🤝 अपने सांसद-विधायक के साथ मिलकर मोहल्ले का काम कराओ💰 हर साल ₹5 करोड़ सांसद निधि + ₹5 करोड़ विधायक निधि — आपके क्षेत्र के लिए📋 वे वही सिफ़ारिश कर सकते हैं जो कोई माँगे — अच्छा प्रस्ताव उनका काम आसान करता है
मिलकर काम कराने का तरीका

मोहल्ले का काम
कराने का तरीका

आपके सांसद और विधायक — दोनों के पास हर साल ₹5-₹5 करोड़ की निधि है, आपके ही क्षेत्र के विकास के लिए। पर वे वही काम सिफ़ारिश कर सकते हैं जो कोई सामने रखे। एक साफ़ प्रस्ताव लिखना उनका काम आसान करता है, और आपका काम बनाता है। तरीका नीचे है।

आप किस विधानसभा में आते हो?

पता नहीं? आपके वोटर ID पर लिखा होता है, या voters.eci.gov.in पर देख लो।

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पहले यह समझ लो

यह निधि कैसे चलती है

एक आम ग़लतफ़हमी दूर कर लें — यह ₹5 करोड़ सांसद या विधायक को नहीं मिलते। पैसा सीधे ज़िला प्रशासन के पास आता है। जनप्रतिनिधि का काम है यह सिफ़ारिश करना कि पैसा किस काम में लगे; मंज़ूरी DM देते हैं और काम विभाग करता है। यानी वे आपकी बात प्रशासन तक पहुँचाने का ज़रिया हैं।

  1. केंद्र/राज्य सरकार पैसा भेजती हैMPLADS का ₹5 करोड़ सांसद के नोडल ज़िले के ज़िला प्रशासन को — दो किस्तों में, ₹2.5 करोड़ प्रत्येक। विधायक निधि राज्य सरकार से।
  2. आप या कोई नागरिक काम की माँग रखता हैमोहल्ले की नाली, स्कूल की बाउंड्री, हैंडपंप, सोलर लाइट — प्रार्थना-पत्र सांसद/विधायक को।
  3. जनप्रतिनिधि सिफ़ारिश करते हैंअपने लेटरहेड पर, हस्ताक्षर के साथ, ज़िला प्रशासन को भेजते हैं। यही उनका असली अधिकार है — सिफ़ारिश का।
  4. ज़िला प्रशासन जाँचकर मंज़ूरी देता हैDM देखते हैं कि काम नियमों में आता है या नहीं, फिर पैसा मंज़ूर करते हैं और कार्यदायी संस्था चुनते हैं।
  5. विभाग/एजेंसी काम करती हैPWD, नगर पालिका, ग्राम पंचायत — जो भी तय हो। तीसरे पक्ष से जाँच व गुणवत्ता परीक्षण का प्रावधान है।
यह आपके काम की बात है: MPLADS का पैसा lapse नहीं होता — जो किसी साल ख़र्च नहीं होता, वह आगे के लिए उपलब्ध रहता है। इसका मतलब यह है कि अच्छा प्रस्ताव कभी भी रखा जा सकता है — बजट ख़त्म होने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता। कौन-कौन से काम हुए और अभी कितनी राशि उपलब्ध है, यह mplads.gov.in पर काफ़ी हद तक सार्वजनिक है — देखकर प्रस्ताव रखो तो बात और मज़बूत होती है।
नियम

इस पैसे से क्या बन सकता है, क्या नहीं

माँगने से पहले यह जान लो — नियमों के बाहर की माँग वैसे ही ख़ारिज हो जाएगी।

बन सकता है

  • सड़क, नाली, पुलिया, खड़ंजा
  • स्कूल का कमरा, बाउंड्री, शौचालय, फ़र्नीचर
  • हैंडपंप, पानी की टंकी, पेयजल व्यवस्था
  • सार्वजनिक जगहों पर सोलर लाइट
  • अस्पताल/स्वास्थ्य केंद्र के उपकरण
  • खेल मैदान व खेल सुविधाएँ
  • सामुदायिक भवन, पुस्तकालय
  • एम्बुलेंस, शव-वाहन जैसे चल संसाधन (सरकारी संस्थाओं के लिए)

नहीं बन सकता

  • किसी की निजी ज़मीन या निजी सम्पत्ति पर कुछ भी
  • तनख़्वाह, बिजली बिल, मरम्मत — कोई भी बार-बार आने वाला ख़र्च
  • सरकारी दफ़्तर या आवासीय भवन
  • स्मारक, मूर्ति
  • नए पद बनाना
  • ऐसे ट्रस्ट/संस्था को मदद जिसमें सांसद या उनका परिवार पदाधिकारी हो
  • निजी व्यापार या व्यक्ति को सीधा लाभ
ट्रस्ट/संस्था की सीमा: MPLADS के नियमों के अनुसार किसी एक ट्रस्ट या सोसाइटी को उसके पूरे जीवनकाल में ₹50 लाख से ज़्यादा नहीं, और एक सांसद एक साल में सभी ट्रस्टों को मिलाकर ₹1 करोड़ से ज़्यादा नहीं दे सकते। SC बहुल क्षेत्रों के लिए सालाना कम से कम 15% और ST के लिए 7.5% ख़र्च करना अनिवार्य है।
असली काम की बात

अपने मोहल्ले के लिए कैसे माँगो

कोई फ़ॉर्म नहीं होता। एक सादा प्रार्थना-पत्र काफ़ी है — पर उसमें क्या लिखा है, यह मायने रखता है।

  1. काम साफ़-साफ़ लिखो"मोहल्ले में विकास कराया जाए" से कुछ नहीं होगा। लिखो — क्या, कहाँ, कितना, कितने लोगों को फ़ायदा। जैसे: "कटरा वार्ड, गली नं॰ 4 में 120 मीटर खड़ंजा — लगभग 60 परिवार लाभान्वित।"
  2. देखो कि नियम में आता है या नहींऊपर की सूची देख लो। सरकारी ज़मीन पर स्थायी निर्माण — हाँ। किसी की निजी दीवार — नहीं।
  3. हस्ताक्षर जुटाओमोहल्ले के 10–20 लोगों के हस्ताक्षर लगाओ। एक आदमी की चिट्ठी और साठ परिवारों की चिट्ठी — दोनों का वज़न अलग होता है।
  4. दोनों जगह दो — और रिसीविंग लोसांसद/विधायक के कार्यालय में, और एक प्रति जिलाधिकारी को। मोहर व तारीख़ वाली रिसीविंग ज़रूर लो — यही आगे सबूत है।
  5. पीछा करोमहीने भर बाद पूछो कि सिफ़ारिश गई या नहीं। जवाब न मिले तो RTI लगाओ — तब बताना पड़ता है।
जानना ज़रूरी है

उनके पास कौन-सी ताक़त है

यह समझना दोनों के लिए अच्छा है — तब हम सही चीज़ सही जगह माँगते हैं, और काम जल्दी होता है।

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कानून बनाना

सांसद का पहला काम संसद में कानून बनाना, बहस करना और वोट देना है — विधायक का विधानसभा में। यह पूरे देश-प्रदेश के लिए होता है, और सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यही है।

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आपकी आवाज़ बनना

सदन में क्षेत्र की बात उठाना, सरकार से सवाल पूछना, समितियों में बैठना, और प्रशासन तक जनता की बात पहुँचाना। इसीलिए अपनी बात उन तक पहुँचाना काम करता है।

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निधि की सिफ़ारिश

क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए ₹5 करोड़ सालाना की सिफ़ारिश करना। यह उनके काम का एक हिस्सा है — और वही हिस्सा है जिसमें आपका प्रस्ताव सीधे काम आता है

एक बात जो समय बचाती है: जनप्रतिनिधि अधिकारी को आदेश नहीं देते — वह प्रशासन का अपना ढाँचा है। इसलिए दो अलग रास्ते हैं: नाली पहले से है और साफ़ नहीं हो रही → यह अधिकारी का काम है (रोडमैप देखो)। नई नाली बननी है, जिसके लिए पैसा चाहिए → तब सांसद/विधायक निधि का प्रस्ताव। सही दरवाज़ा चुनने से काम कई महीने जल्दी होता है।
दोनों का फ़ायदा

अच्छा प्रस्ताव सबका काम आसान करता है

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जनप्रतिनिधि के लिए

हर क्षेत्र में ज़रूरतें बहुत हैं और निधि सीमित। जब जनता साफ़-साफ़ लिखकर बताती है कि कहाँ क्या चाहिए और कितने लोगों को फ़ायदा होगा, तो प्राथमिकता तय करना आसान हो जाता है।

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प्रशासन के लिए

DM को हर प्रस्ताव नियमों पर परखना होता है। जिसमें जगह, लागत, ज़मीन की स्थिति और लाभार्थी साफ़ लिखे हों — वह जल्दी पास होता है। अधूरा प्रस्ताव महीनों घूमता रहता है।

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मोहल्ले के लिए

निधि तभी काम आती है जब कोई माँगे। जो मोहल्ले संगठित होकर लिखते हैं, उनका काम पहले होता है — इसमें कोई पक्षपात नहीं, बस यह है कि उनका प्रस्ताव तैयार होता है।

पारदर्शिता

यह जानकारी पहले से सार्वजनिक है

निधि का ब्योरा किसी से माँगना नहीं पड़ता — सरकार ख़ुद इसे ऑनलाइन रखती है। प्रस्ताव रखने से पहले देख लो कि पहले क्या-क्या हुआ है; इससे आपकी बात ज़्यादा ठोस बनती है और दोहराव भी नहीं होता।

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ख़ुद देख लो — कहीं पूछने की ज़रूरत नहीं

सब कुछ खुले में उपलब्ध है:

mplads.gov.in — सांसद निधि से हुए काम, उनकी स्थिति व ख़र्च
prsindia.org — सांसद की हाज़िरी, सदन में पूछे गए सवाल व बहस
sansad.in — लोकसभा का आधिकारिक रिकॉर्ड
uplegisassembly.gov.in — उत्तर प्रदेश विधानसभा
myneta.info — चुनावी शपथ-पत्र (ADR द्वारा, निर्वाचन आयोग के आँकड़ों से)

📝

प्रस्ताव में यह जोड़ो, बात बन जाएगी

अधिकारी और जनप्रतिनिधि दोनों को यही चाहिए होता है — साफ़ ब्योरा:

• काम की सही जगह — वार्ड/गाँव, गली का नाम, landmark
कितना — लंबाई, संख्या, अनुमानित लागत
कितने लोगों को फ़ायदा — परिवारों की संख्या
• ज़मीन सरकारी है — यह लिखना ज़रूरी है
• मोहल्ले के हस्ताक्षर व एक फोटो

ड्राफ्ट बनवाओ →

मोहल्ले में कोई काम चाहिए? 📋

निधि मौजूद है, नियम साफ़ हैं। बस एक अच्छा प्रस्ताव चाहिए। ड्राफ्ट बनवाओ, मोहल्ले के हस्ताक्षर जुटाओ, और अपने जनप्रतिनिधि व ज़िला प्रशासन — दोनों को दे आओ।

प्रार्थना-पत्र बनाओ