दिल्ली, नोएडा, कानपुर, मुंबई में बैठे इटावा वाले
हर साल इटावा से बच्चे पढ़ने जाते हैं, नौकरी करने जाते हैं, और वहीं बस जाते हैं। वे शादी में आते हैं, होली-दिवाली पर आते हैं, माँ-बाप से रोज़ बात करते हैं — पर शहर से जुड़े रहने का उनके पास कोई रास्ता नहीं है।
और यह अजीब बात है, क्योंकि उनके पास वह सब है जो शहर को चाहिए — पैसा, हुनर, जान-पहचान, और सबसे बढ़कर, लौटने की चाह। कोई पूछता ही नहीं। कोई बुलाता ही नहीं।
अगर आप इटावा से हो और बाहर रहते हो — यह मंडली आपकी है। दूर से भी बहुत कुछ हो सकता है: किसी बच्चे को ऑनलाइन पढ़ाना, किसी को नौकरी दिलाना, किसी काम के लिए चंदा, या सिर्फ़ यह बताना कि बाहर की दुनिया कैसे चलती है।
मैं बाहर से हूँ — जोड़ो मुझेअपनी मंडली चुनो
हर मंडली एक WhatsApp ग्रुप है, और उसके साथ महीने में एक असली मुलाक़ात। कोई फ़ीस नहीं, कोई फ़ॉर्म नहीं।
मंडली तभी चलेगी जब कोई चलाएगा
जो ग्रुप चलते हैं उनमें एक ही फ़र्क़ होता है — एक आदमी जो हर महीने याद दिलाता है। बस इतना।
काम क्या है
महीने में एक बार तारीख़ तय करना, ग्रुप में याद दिलाना, और ख़ुद पहुँचना। बस। कोई फंड नहीं संभालना, कोई हिसाब नहीं रखना।
कितना समय
महीने में दो घंटे — एक मुलाक़ात का, और थोड़ा ग्रुप में बोलने का। इससे ज़्यादा माँगा तो ख़ुद ही छोड़ दोगे, और हम यही नहीं चाहते।
क्यों करो
क्योंकि जिस चीज़ में आपका मन लगता है, उसमें अकेले रहना बोर है। और शहर में वैसे दस लोग ज़रूर हैं — बस कोई बुलाने वाला नहीं।
काम करने के लिए ढूँढना नहीं पड़ेगा
ज़्यादातर सेवा-समूह इसलिए बैठ जाते हैं क्योंकि हर बार सोचना पड़ता है कि "अब क्या करें"। यहाँ वह दिक़्क़त नहीं है — शहर की असली समस्याएँ पहले से लिखी हुई हैं।
काम की सूची पहले से तैयार है
City Issues बोर्ड पर लोग असली समस्याएँ लिखते हैं — कहाँ सफ़ाई नहीं, कहाँ लाइट नहीं, कहाँ पानी नहीं। सेवा मंडली वहीं से काम उठा सकती है।
और Directory में स्कूल, अस्पताल, पशु चिकित्सालय — सब जगह लिखी हैं जहाँ हाथ की ज़रूरत है।
पहले कुछ काम जो आसान हैं
• यमुना घाट या किसी पार्क की सफ़ाई — एक रविवार
• रक्तदान शिविर — जिला अस्पताल के साथ
• सरकारी स्कूल में हफ़्ते में एक घंटा पढ़ाना
• पेड़ लगाना और उन्हें बचाना (लगाना आसान है, बचाना असली काम)
• बुज़ुर्गों को स्मार्टफ़ोन व ऑनलाइन काम सिखाना
• आवारा कुत्तों-गायों के लिए पानी की व्यवस्था — गर्मी में
चार बातें
यह है
- सबके लिए खुली — उम्र, जाति, धर्म, पैसा, बाहर या अंदर — कोई शर्त नहीं
- मुफ़्त — कोई सदस्यता शुल्क नहीं। मुलाक़ात का ख़र्च सब मिलकर बाँट लेंगे
- छोटी शुरुआत — छह लोग काफ़ी हैं। भीड़ का इंतज़ार नहीं
- आपकी अपनी — मंडली चलाने वाले तय करेंगे कि क्या करना है, हम नहीं
यह नहीं है
- बेचने की जगह नहीं — MLM, बीमा, चिट फंड — एक बार भी हुआ तो बाहर
- राजनीति नहीं — मंडली में दल नहीं चलेगा
- धार्मिक प्रचार नहीं — सेवा सबकी, प्रचार किसी का नहीं
- फोटो के लिए नहीं — काम पहले, तस्वीर बाद में। बैनर-माला वाला कार्यक्रम कहीं और
आपका शौक़ सूची में नहीं? 🎯
शतरंज, बागवानी, पक्षी देखना, कविता, कुकिंग, साइकिलिंग, कोडिंग — जो भी हो, बताओ। अगर तीन लोग और मिल गए, मंडली बन जाएगी।
नई मंडली सुझाओ