🏛️ हर विभाग का अपना बजट है — और हर विभाग का अपना पोर्टल📊 ज़िले का कुल बजट कहीं एक जगह नहीं छपता — पर टुकड़ों में सब मिल जाता है📜 ज़िला योजना समिति का दस्तावेज़ RTI से माँगा जा सकता है🏛️ हर विभाग का अपना बजट है — और हर विभाग का अपना पोर्टल📊 ज़िले का कुल बजट कहीं एक जगह नहीं छपता — पर टुकड़ों में सब मिल जाता है📜 ज़िला योजना समिति का दस्तावेज़ RTI से माँगा जा सकता है
विभाग-वार · कहाँ से आता है, कहाँ दिखता है

इटावा का पैसा
किस विभाग के पास

सड़क का पैसा अलग विभाग के पास है, बिजली का अलग, स्कूल का अलग। हर एक का अपना बजट, अपना अधिकारी और अपना पोर्टल। यह पन्ना पूरा नक़्शा दिखाता है — कौन क्या ख़र्च करता है, पैसा कहाँ से आता है, और असली आँकड़ा कहाँ मिलेगा।

शुरू में ही साफ़ कर दें

ज़िले का कुल बजट कहीं प्रकाशित नहीं होता

उत्तर प्रदेश का राज्य बजट सार्वजनिक है, हर योजना का बजट भी — पर ज़िलेवार कुल बजट सरकार अलग से प्रकाशित नहीं करती। पैसा दर्जनों विभागों, योजनाओं और मदों से आता है, और हर एक का हिसाब अपनी-अपनी जगह रहता है।

इसीलिए इस पन्ने पर ज़िले के बजट का कोई अनुमान नहीं दिया गया। अंदाज़े का आँकड़ा एक बार छप जाए तो लोग उसी को सच मानकर आगे बढ़ा देते हैं।

नीचे वह है जो उपलब्ध है: हर विभाग क्या ख़र्च करता है, उसका पैसा किस रास्ते आता है, हिसाब कहाँ दिखता है, और न दिखे तो किससे माँगा जाए।

रास्ता

पैसा ज़िले तक कैसे पहुँचता है

हर रुपया इनमें से किसी एक रास्ते से आता है। यह समझ लो तो पता चल जाएगा कि किस चीज़ का हिसाब कहाँ माँगना है।

ऊपर से
केंद्र सरकारकेंद्रीय योजनाएँ (मनरेगा, PM आवास, जल जीवन मिशन, आयुष्मान), वित्त आयोग का अनुदान, और सांसद निधि।
राज्य
उत्तर प्रदेश सरकारराज्य का अपना बजट (2026-27 में लगभग ₹9 लाख करोड़) + केंद्रीय करों में हिस्सा। यहीं से विभागों को आवंटन होता है — PWD, बेसिक शिक्षा, स्वास्थ्य, जल निगम आदि।
ज़िला
ज़िला प्रशासन व विभागीय दफ़्तरहर विभाग का अपना ज़िला कार्यालय व अपना बजट — PWD खंड, विद्युत खंड, BSA, CMO। सांसद/विधायक निधि भी यहीं आती है। ज़िला योजना समिति सालाना ज़िला योजना मंज़ूर करती है।
नीचे
ब्लॉक → पंचायत / नगर पालिकाग्राम पंचायत को वित्त आयोग का अनुदान सीधे मिलता है (60% बँधा, 40% खुला)। शहर में नगर पालिका का अपना बजट व कर-राजस्व।
इसीलिए एक जगह हिसाब नहीं मिलता: एक ही सड़क के लिए पैसा PWD से आ सकता है, नगर पालिका से, पंचायत के untied अनुदान से, या सांसद निधि से — यह इस पर निर्भर है कि सड़क किसकी है। इसलिए पहले यह पता करो कि वह चीज़ किस विभाग की है — फिर हिसाब वहीं से मिलेगा।
जो आँकड़े पक्के हैं

ये तीन संख्याएँ तय हैं

अंदाज़ा नहीं — ये नियमों में लिखी हैं और हर जगह एक जैसी लागू होती हैं।

₹5 करोड़
प्रति सांसद, प्रति वर्ष (MPLADS)
पूरी लोकसभा के लिए · mplads.gov.in
₹5 करोड़
प्रति विधायक, प्रति वर्ष (विधायक निधि)
मई 2022 में ₹3 करोड़ से बढ़ाई गई
60% / 40%
पंचायत अनुदान — बँधा / खुला
बँधा सिर्फ़ पानी-सफ़ाई पर · 15वाँ वित्त आयोग
राज्य के स्तर पर: UP का 2026-27 का बजट लगभग ₹9 लाख करोड़ से ऊपर है। पिछले बजट में क्षेत्रवार हिस्सा कुछ इस तरह रहा — बुनियादी ढाँचा ~22%, शिक्षा ~13%, कृषि व सम्बद्ध ~11%, चिकित्सा-स्वास्थ्य ~6%, सामाजिक सुरक्षा ~4%। पर यह पूरे प्रदेश का है, इटावा का हिस्सा इसमें अलग से नहीं लिखा होता। ताज़ा व सटीक आँकड़े PRS India या राज्य के बजट दस्तावेज़ों पर।
पूरा नक़्शा

कौन-सा विभाग, कौन-सा पैसा

किसी भी विभाग पर टैप करो — क्या करता है, पैसा कहाँ से आता है, हिसाब कहाँ दिखता है, और RTI में क्या पूछना है।

असली जवाब

ज़िले का हिसाब चाहिए तो — ज़िला योजना

ज़िला योजना समिति (District Planning Committee) हर साल ज़िला योजना मंज़ूर करती है — जिसमें विभागवार प्रस्ताव व राशि होती है। यह दस्तावेज़ मौजूद है। छपता भले न हो, पर माँगा जा सकता है

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RTI में यह पूछो

जन सूचना अधिकारी, ज़िला अर्थ एवं संख्या अधिकारी / मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, इटावा को — ₹10 में:

• विगत 3 वित्तीय वर्षों की अनुमोदित ज़िला योजना की प्रति
• उसमें विभागवार प्रस्तावित एवं स्वीकृत धनराशि
• प्रत्येक विभाग को वास्तव में अवमुक्त (released) राशि
• व्यय की स्थिति व अव्ययित राशि
• ज़िला योजना समिति की बैठकों की कार्यवृत्त (minutes)

RTI ड्राफ्ट बनवाओ →
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पहले यह आज़माओ — मुफ़्त व तुरंत

RTI से पहले ये देख लो, बहुत कुछ यहीं मिल जाता है:

पंचायत का पूरा हिसाब — egramswaraj.gov.in (बिना लॉगिन)
मनरेगा का हर काम व मज़दूरी — nrega.nic.in
सांसद निधि के काम — mplads.gov.in
DBT/किस्त पहुँची या नहीं — pfms.nic.in
स्कूल का ब्योरा — udiseplus.gov.in

पूरी सूची जनता का पैसा पन्ने पर है।

सही विभाग पता चल गया? 🎯

आधी लड़ाई यही थी। अब उसी विभाग के सही अधिकारी को, सही भाषा में अर्ज़ी लिखो — या RTI लगाओ।

कौन अधिकारी ज़िम्मेदार है →