🤝 छोटे शहर में अकेले बनाना मुश्किल है — साथ में आसान📅 पहली मीटिंग के लिए 8 लोग चाहिए — RSVP भेजो🙋 मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, तरीका है🤝 छोटे शहर में अकेले बनाना मुश्किल है — साथ में आसान📅 पहली मीटिंग के लिए 8 लोग चाहिए — RSVP भेजो🙋 मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, तरीका है
अभी शून्य से शुरू हो रहा है

इटावा में कुछ बना रहे हो?
अकेले मत बनाओ

बड़े शहर में जो चीज़ मुफ़्त मिलती है वह है — साथ में बैठे दस लोग जो वही झेल रहे हैं। छोटे शहर में वही सबसे मुश्किल है। यह पन्ना कोई डायरेक्टरी नहीं — यह पहली मीटिंग बुलाने की कोशिश है।

में से ८ लोग — पहली मीटिंग के लिए

हम तारीख़ पहले तय नहीं करेंगे और फिर ख़ाली कुर्सियों के साथ नहीं बैठेंगे। जब आठ लोग हाँ बोल देंगे, तब तारीख़ तय होगी — और सबको WhatsApp पर बता दी जाएगी। बस इतना सीधा।

मैं आऊँगा — RSVP भेजो

कोई फ़ीस नहीं · कोई रजिस्ट्रेशन नहीं · बस एक WhatsApp मैसेज

ऊपर की गिनती आपके अपने फ़ोन में रखी जाती है — यह पूरे शहर का आँकड़ा नहीं है। असली गिनती WhatsApp पर आए संदेशों की होगी, और वही यहाँ अपडेट होगी।
डेढ़ घंटा · महीने में एक बार

मीटिंग में होता क्या है

कोई भाषण नहीं, कोई मुख्य अतिथि नहीं, कोई फ़ीता नहीं काटा जाएगा। एक कमरा, कुर्सियाँ, चाय — और यह क्रम।

  1. ३० मिनटसबका परिचय — ३-३ मिनटनाम, क्या करते हो, और अभी जो एक चीज़ अटकी है। बस इतना। लंबा भाषण नहीं — घड़ी चलेगी।
  2. ३० मिनटएक की समस्या, सबकी अक़्लहर बार एक व्यक्ति अपनी असली दिक़्क़त विस्तार से रखेगा — बाक़ी सब सुझाव देंगे। अगली बार किसी और की बारी। यही सबसे काम का हिस्सा होता है।
  3. २० मिनटमदद का दौरहर कोई एक चीज़ माँगेगा और एक चीज़ देगा। "मुझे CA चाहिए" — "मेरा जानने वाला है।" ज़्यादातर काम यहीं बन जाते हैं।
  4. १० मिनटअगली बार कब, कहाँ, कौनअगली तारीख़ तय, और अगली बार कौन जगह देगा व किसकी समस्या सुनी जाएगी — यह भी वहीं तय।
जगह की बात: शुरुआत में किसी की दुकान का पिछला कमरा, कोई कैफ़े, कोई कोचिंग की ख़ाली क्लास — कुछ भी चलेगा। पहली मीटिंग के लिए हॉल बुक करने की ज़रूरत नहीं। जो आठ लोग आएँगे उन्हें कुर्सी से मतलब नहीं होगा।
यही तय करता है कि समुदाय चलेगा या मर जाएगा

चार नियम

ज़्यादातर ग्रुप इसलिए मर जाते हैं क्योंकि कोई बेचने लगता है और बाक़ी भाग जाते हैं। इसलिए ये नियम पहले दिन से।

यह करो

  • असली दिक़्क़त बोलो — "सब बढ़िया चल रहा है" से किसी को कुछ नहीं मिलता
  • कुछ देकर जाओ — एक सुझाव, एक नंबर, एक जान-पहचान। सिर्फ़ लेने वाले से समुदाय नहीं बनता
  • सब बराबर हैं — चार लोगों की दुकान और सॉफ़्टवेयर कंपनी, दोनों एक ही कुर्सी पर
  • जो कमरे में बोला गया, कमरे में रहेगा — नुक़सान, उधार, झगड़ा — कुछ भी बाहर नहीं

यह बिल्कुल नहीं

  • कोई बेचना नहीं — MLM, बीमा, चिट फंड, नेटवर्क मार्केटिंग। एक बार भी हुआ तो ग्रुप ख़त्म
  • राजनीति नहीं — यहाँ सबका काम एक है, दल अलग हो सकते हैं
  • बड़े नाम की तलाश नहीं — मुख्य अतिथि, फोटो सेशन, बैनर — इनसे कोई कंपनी नहीं बनी
  • ताना नहीं — किसी के idea पर हँसना सबसे सस्ता काम है। सवाल पूछो, मज़ाक़ मत उड़ाओ
मीटिंग का इंतज़ार मत करो

मदद का बोर्ड

दो सवाल — आपको क्या चाहिए, और आप क्या दे सकते हो। दोनों भेजो, हम मिलाने की कोशिश करेंगे। यह दो लोगों के साथ भी काम करता है।

🙋 मुझे यह चाहिए

माँगना कमज़ोरी नहीं है — यही सबसे तेज़ रास्ता है।

🤲 मैं यह दे सकता हूँ

आपके लिए मामूली बात किसी और के लिए महीनों की बचत है।

इस महीने का सवाल

अपना जवाब भेजो

अच्छे जवाब अगली मीटिंग में और community में साझा किए जाएँगे — नाम के साथ, अगर आप चाहो।

सबसे ज़्यादा हिम्मत यही देती है

अपनी कहानी सुनाओ

"कामयाबी की कहानी" नहीं चाहिए। असली वाली चाहिए — जिसमें ग़लतियाँ भी हों। जो पढ़ेगा उसे लगना चाहिए "ये तो मैं भी कर सकता हूँ", न कि "ये लोग अलग मिट्टी के हैं"।

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पाँच सवाल — बस इतना लिखो

1. क्या बनाया/करते हो, एक लाइन में?
2. शुरू कैसे हुआ — पहला ग्राहक कैसे मिला?
3. सबसे बड़ी ग़लती जो की?
4. इटावा में होने से क्या मुश्किल हुआ, क्या आसान?
5. जो अभी शुरू कर रहा है उसे एक बात क्या कहोगे?

कहानी भेजो
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"मेरा तो startup नहीं है" — फिर भी भेजो

यह समुदाय सिर्फ़ ऐप बनाने वालों का नहीं है। दुकान चलाते हो, कोचिंग पढ़ाते हो, खेत से सीधा बेचते हो, YouTube चैनल है, सिलाई का काम बढ़ाया है — यह सब कारोबार है और यही असली इटावा है।

जिसने कुछ भी ज़ीरो से खड़ा किया है, उसके पास सिखाने को कुछ है।

पहला बनना सबसे मुश्किल है 🚀

आठ में से पहला होना अजीब लगता है — पर हर समुदाय किसी एक के हाँ बोलने से शुरू होता है। बाक़ी सात भी यही सोच रहे हैं।

RSVP भेजो