⚖️ सही अधिकारी को शिकायत = आधा काम हो गया📋 हर स्तर पर रिसीविंग लो — बिना सबूत शिकायत का कोई मतलब नहीं📅 संपूर्ण समाधान दिवस — महीने के पहले व तीसरे शनिवार, तहसील में⚖️ सही अधिकारी को शिकायत = आधा काम हो गया📋 हर स्तर पर रिसीविंग लो — बिना सबूत शिकायत का कोई मतलब नहीं📅 संपूर्ण समाधान दिवस — महीने के पहले व तीसरे शनिवार, तहसील में
हर शिकायत का सही रास्ता

किसकी शिकायत,
किससे करें?

ज़्यादातर शिकायतें इसलिए नहीं सुनी जातीं क्योंकि वे ग़लत आदमी के पास जाती हैं। यहाँ हर विभाग की पूरी सीढ़ी है — किस स्तर पर कौन ज़िम्मेदार है, कितने दिन में जवाब देना है, और आगे कहाँ जाना है।

अपनी बात लिखो, रास्ता हम बताएँगे

विभाग का नाम पता होना ज़रूरी नहीं। जैसे बोलते हो वैसे लिखो — "गली में सड़क नहीं बनी", "कोटेदार कम राशन देता है", "ट्रांसफॉर्मर जल गया"।

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या सीधे समस्या चुनिए

    आपकी डायरी

    मेरी शिकायतें

    शिकायत देने की तारीख़ यहाँ दर्ज करो। हम गिनती रखेंगे और बताएँगे कि कब अगले स्तर पर जाने का हक़ बन गया। सब कुछ आपके ही फ़ोन में रहता है।

    जो कम लोग जानते हैं

    समाधान दिवस — जहाँ सब अधिकारी एक साथ बैठते हैं

    महीने में तय दिन ऐसे होते हैं जब अधिकारी एक जगह बैठकर आम लोगों की शिकायत सीधे सुनते हैं। यहाँ जाने का मतलब है — बिना चक्कर लगाए, सामने बैठकर बात।

    पहला व तीसरा शनिवार

    संपूर्ण समाधान दिवस

    तहसील मुख्यालय पर — DM/SDM व सभी विभागों के अधिकारी एक साथ। ज़मीन, राशन, पेंशन, बिजली, पुलिस — कोई भी मामला सीधे रख सकते हो। शिकायत मौके पर दर्ज होती है।

    दूसरा व चौथा शनिवार

    थाना समाधान दिवस

    थाने पर — पुलिस व राजस्व अधिकारी साथ बैठते हैं। ज़मीनी विवाद, मारपीट, पुराने मामले — जहाँ पुलिस और लेखपाल दोनों की ज़रूरत हो, वहाँ यह सबसे कारगर है।

    तय दिन

    जनता दर्शन (DM)

    जिलाधिकारी कार्यालय, कलेक्ट्रेट पर — DM सीधे प्रार्थना-पत्र लेते हैं। जब नीचे के सब स्तर आज़मा चुके हों, तब यहाँ जाएँ, पुरानी शिकायतों की रिसीविंग साथ लेकर।

    ध्यान रहे: तारीख़ें व दिन प्रशासन बदल सकता है, और छुट्टी पड़ने पर आगे-पीछे होते हैं। जाने से पहले तहसील/थाने या 1076 पर पुष्टि कर लें।
    हर विभाग पर लागू

    ये चार रास्ते हमेशा खुले हैं

    1076

    CM हेल्पलाइन

    किसी भी विभाग की शिकायत। शिकायत नंबर मिलता है, अधिकारी को समय-सीमा में जवाब देना पड़ता है, और आप संतुष्ट न हों तो दोबारा खुल जाती है।

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    जनसुनवाई पोर्टल

    jansunwai.up.nic.in (IGRS) — ऑनलाइन दर्ज करो, स्थिति ट्रैक करो। मोबाइल पर हर अपडेट आता है।

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    RTI — 30 दिन

    शिकायत का जवाब देना मर्ज़ी है, RTI का जवाब देना कानूनी मजबूरी। ₹10 में पूछो — बजट कितना था, ठेका किसे मिला, देरी क्यों हुई।

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    मंडल व राज्य स्तर

    ज़िले में न सुने तो मंडलायुक्त (कानपुर मंडल), फिर सम्बंधित विभाग का निदेशालय व मुख्यमंत्री कार्यालय।

    बिना इनके कुछ नहीं होगा

    पाँच नियम जो हर शिकायत पर लागू हैं

    1. रिसीविंग हमेशा लोअपनी कॉपी पर कार्यालय की मोहर व तारीख़। बिना रिसीविंग के आपने शिकायत दी ही नहीं — कानूनन कुछ साबित नहीं होगा।
    2. क्रम मत तोड़ोसीधे DM के पास जाओगे तो वे नीचे ही भेज देंगे। पहले नीचे का स्तर आज़माओ, उसका सबूत रखो — फिर ऊपर जाने का हक़ बनता है।
    3. तारीख़ लिखते रहोकब दी, किसे दी, शिकायत नंबर क्या मिला, कितने दिन हुए। यही डायरी आगे आपका सबसे बड़ा हथियार है।
    4. अकेले मत लड़ोमोहल्ले के 4-5 लोगों के हस्ताक्षर करा लो। एक आदमी की शिकायत टल जाती है, दस लोगों की नहीं।
    5. तथ्य ही लिखोजो हुआ वही, बढ़ा-चढ़ाकर नहीं। झूठी शिकायत आपके ही ख़िलाफ़ जाती है और आगे की सारी बात कमज़ोर कर देती है।
    शब्दावली

    ये अधिकारी होते कौन हैं?

    सरकारी काग़ज़ों में अंग्रेज़ी के ये छोटे नाम आते हैं। किसका क्या मतलब है, और कौन किससे बड़ा है — यह जानना ही आधी लड़ाई है।

    रास्ता पता चल गया? अब अर्ज़ी लिखवाओ ⚖️

    सही अधिकारी का नाम पता है, तो आधा काम हो गया। अब AI से औपचारिक शिकायत पत्र व RTI ड्राफ्ट बनवाओ — उसी अधिकारी के नाम, सही धारा के साथ।

    शिकायत व RTI ड्राफ्ट बनाएँ