eGramSwaraj — पंचायत का पूरा बहीखाता
पंचायती राज मंत्रालय का पोर्टल। देश की हर ग्राम पंचायत का पैसा, योजना और काम — सब यहाँ दर्ज होता है। सबसे अच्छी बात: आम नागरिक बिना लॉगिन के रिपोर्ट देख सकता है।
Financial Report
कितना पैसा आया और किस मद से — 15वें वित्त आयोग का अनुदान, मनरेगा, राज्य की योजनाएँ। साथ में ख़र्च का पूरा ब्योरा और बचत।
Planning Report (GPDP)
ग्राम पंचायत विकास योजना — इस साल कौन-कौन से काम तय हुए, कितनी लागत के। GPDP चढ़ाना अनिवार्य है, वरना अनुदान रुक जाता है।
Geo-Tagging Report
यह सबसे काम का है — हर काम की फोटो और GPS लोकेशन चढ़ती है। यानी काग़ज़ पर बना काम ज़मीन पर है या नहीं, आप ख़ुद देख सकते हो।
देखने का तरीका
- egramswaraj.gov.in खोलोमोबाइल पर भी चलता है। ऐप भी है — "eGramSwaraj"।
- Reports में जाओलॉगिन की ज़रूरत नहीं — नागरिक के लिए रिपोर्ट खुली हैं।
- अपना पता चुनोState: Uttar Pradesh → District: Etawah → Block (विकास खंड) → अपनी ग्राम पंचायत।
- तीनों रिपोर्ट देखोFinancial (पैसा), Planning/GPDP (योजना), Geo-tagging (फोटो व लोकेशन)।
- अब प्रस्ताव रखोपता चल गया कि क्या हो चुका और क्या बचा — अब ग्राम सभा में या प्रधान/BDO को ठोस बात रखो। यही सबसे मज़बूत तरीका है।
पंचायत का पैसा दो तरह का होता है
15वें वित्त आयोग का अनुदान दो हिस्सों में आता है — और एक हिस्सा सिर्फ़ पानी-सफ़ाई पर ही ख़र्च हो सकता है, किसी और काम पर नहीं। यही वजह है कि कई बार सही माँग भी ठुकरा दी जाती है — पैसा था, पर उस मद का नहीं था।
बँधा हुआ (Tied)
सिर्फ़ इन्हीं दो कामों पर — और किसी पर नहीं:
- पीने के पानी की व्यवस्था, जल-संचय, पुनर्भरण
- सफ़ाई, ODF+ बनाए रखना, कचरा प्रबंधन
इसे किसी और काम में नहीं लगाया जा सकता — सड़क या लाइट के लिए यह पैसा माँगना बेकार है।
खुला (Untied)
स्थानीय ज़रूरत के हिसाब से — जैसे:
- पंचायत के भीतर व बीच की सड़कें, मरम्मत
- पैदल रास्ते (footpath)
- LED स्ट्रीट लाइट व सोलर लाइट
- श्मशान/कब्रिस्तान की व्यवस्था व रख-रखाव
- बच्चों का टीकाकरण
पर तनख़्वाह या दफ़्तरी ख़र्च में नहीं लगाया जा सकता।
ग्राम सभा — जहाँ आप ख़ुद बैठ सकते हो
गाँव का हर वयस्क वोटर ग्राम सभा का सदस्य है। यह कोई अनुमति माँगने वाली जगह नहीं — आपकी अपनी सभा है। बजट और कामों का ब्योरा यहीं रखा जाता है, और योजना (GPDP) यहीं मंज़ूर होती है।
जाने का हक़ है
बुलावे का इंतज़ार मत करो — सदस्य आप पहले से हो। बैठक की तारीख़ पंचायत भवन पर लगती है; प्रधान या सचिव से पूछ लो।
पूछने का हक़ है
कितना पैसा आया, कहाँ लगा, अगले साल की योजना क्या है — ये सवाल पूछना ग्राम सभा का मक़सद ही है। पहले eGramSwaraj देखकर जाओ तो बात ठोस होगी।
प्रस्ताव रखने का हक़ है
अपने मोहल्ले का काम GPDP में जुड़वाना है? ग्राम सभा ही वह जगह है जहाँ यह तय होता है। लिखित प्रस्ताव लेकर जाओ और कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज करवाओ।
मनरेगा — यहाँ तो एक-एक मज़दूर का नाम खुला है
देश की सबसे खुली योजना यही है। nrega.nic.in पर गाँव-दर-गाँव, काम-दर-काम, यहाँ तक कि मस्टर रोल में किसने कितने दिन काम किया और कितना पैसा मिला — सब सार्वजनिक है।
क्या-क्या दिख जाता है
• जॉब कार्ड धारकों की सूची — नाम सहित
• कौन-सा काम कब हुआ, कितनी लागत का
• मस्टर रोल — किसने कितने दिन काम किया
• किसको कितनी मज़दूरी, कब मिली
• कितना भुगतान लंबित है
• मज़दूरी व सामग्री का अलग-अलग ख़र्च
आपके हक़
• जॉब कार्ड बनवाना निःशुल्क है
• काम माँगने पर लिखित रसीद मिलनी चाहिए
• 15 दिन में काम न मिले तो बेरोज़गारी भत्ता का प्रावधान
• मज़दूरी सीधे बैंक/डाकघर खाते में
• सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) अनिवार्य है — इसमें गाँव के सामने हिसाब पढ़ा जाता है
• शिकायत — BDO या ज़िला कार्यक्रम समन्वयक (DM)
नगर पालिका का पैसा
शहरी निकायों का डेटा गाँव जितना खुला नहीं है — यहाँ रास्ता थोड़ा अलग है।
बजट सार्वजनिक होता है
नगर पालिका का सालाना बजट बोर्ड में पास होता है और वह सार्वजनिक दस्तावेज़ है। कार्यालय से माँगा जा सकता है।
सभासद आपका प्रतिनिधि है
वार्ड का सभासद बोर्ड बैठक में जाता है। अपने वार्ड में क्या प्रस्तावित है — यह पूछने का सबसे सीधा रास्ता वही है।
RTI सबसे भरोसेमंद
वार्ड-वार बजट, स्वीकृत कार्य, ठेकेदार व भुगतान — ₹10 की RTI से 30 दिन में मिल जाता है। ड्राफ्ट बनवाओ →
जहाँ-जहाँ पैसा दिखता है
ये सब सरकारी पोर्टल हैं और खुले हैं। एक बार bookmark कर लो।
देख लिया? अब प्रस्ताव रखो 📝
आँकड़ा हाथ में हो तो बात का वज़न बदल जाता है। "कुछ काम करा दो" और "GPDP में यह काम नहीं है, untied मद से हो सकता है, 60 परिवारों को फ़ायदा" — दोनों में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ है।
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